Last Updated Oct - 03 - 2025, 05:37 PM | Source : Fela News
अमीर खान मुत्ताकी की भारत यात्रा रणनीतिक, विवादास्पद और मानवीय-सुरक्षा हितों से जुड़ी कूटनीतिक पहल।
अफगानिस्तान के विदेश मंत्री और तालिबान कमांडर अमीर खान मुत्ताकी को लेकर नई हलचल मच गई है। महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ कठोर फैसले लेने और संयुक्त राष्ट्र के बैन झेलने के बावजूद अब उनके भारत आने की खबरें सामने आ रही हैं। सवाल यही है कि आखिर भारत सरकार उन्हें क्यों बुला रही है।
मुत्ताकी तालिबान के उन चेहरों में से हैं जिन पर मानवाधिकार उल्लंघन और महिलाओं की स्वतंत्रता छीनने के गंभीर आरोप लगे। तालिबान शासन में लड़कियों की शिक्षा और महिलाओं के सार्वजनिक जीवन पर लगातार पाबंदियां बढ़ाई गईं और इसमें मुत्ताकी की भूमिका अहम मानी जाती है। इसके बावजूद अंतरराष्ट्रीय मंच पर अब वह तालिबान की ‘कूटनीतिक छवि’ पेश करने की कोशिश कर रहे हैं।
भारत के लिए यह स्थिति काफी पेचीदा है। अफगानिस्तान में तालिबान की हुकूमत बनने के बाद भारत ने सीधे संवाद से दूरी बना ली थी। लेकिन बदलते हालात और पड़ोसी देशों की गतिविधियों को देखते हुए अब भारत भी बैकडोर बातचीत का रास्ता तलाश रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह कदम पूरी तरह रणनीतिक है ताकि अफगानिस्तान में भारत के हित सुरक्षित रह सकें और पाकिस्तान या चीन जैसी ताकतों का दबदबा न बढ़े।
मुत्ताकी की संभावित भारत यात्रा को लेकर एक और पहलू सामने आता है—अफगान जनता के लिए मानवीय मदद। भारत अब तक अफगानिस्तान को खाद्यान्न और दवाइयों जैसी राहत सामग्री भेजता रहा है। संभव है कि भारत इस संपर्क के जरिए वहां अपनी मानवीय और राजनीतिक भूमिका दोनों को बनाए रखना चाहता हो।
हालांकि यह कदम विवाद से अछूता नहीं रह सकता। भारत की साख हमेशा लोकतांत्रिक मूल्यों और मानवाधिकारों की रक्षा से जुड़ी रही है। ऐसे में तालिबान के कट्टर नेताओं से बातचीत का संदेश जनता के बीच और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल खड़े कर सकता है।
स्पष्ट है कि मुत्ताकी का भारत आना केवल एक ‘विजिट’ नहीं बल्कि एक रणनीतिक चाल है। अब देखना यह होगा कि भारत इस मुलाकात से क्या हासिल कर पाता है और तालिबान से बातचीत का रास्ता कितना लंबा चलता है।