Last Updated Dec - 19 - 2025, 05:13 PM | Source : Fela News
भारत-ओमान CEPA साइन, 99% भारतीय निर्यात ड्यूटी फ्री, व्यापार, सेवाओं और निवेश में बड़ा विस्तार, MSME और आयुष को फायदा।
भारत और ओमान ने 18 दिसंबर 2025 को एक व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) साइन किया है, जिसके तहत भारत से ओमान को निर्यात होने वाले लगभग 99.38 % सामान पर 0 टैरिफ (डयूटी फ्री) का लाभ मिलेगा। इस समझौते को मस्कट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक की मौजूदगी में वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और ओमान के वाणिज्य मंत्री ने हस्ताक्षर किया।
यह डील भारत के लिए खास मायने रखती है क्योंकि इससे जेम्स और ज्वैलरी, वस्त्र, चमड़ा, जूते, खेल के सामान, प्लास्टिक, फर्नीचर, इंजीनियरिंग उत्पाद, फार्मा, मेडिकल उपकरण और ऑटोमोबाइल जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को ओमान में शुल्क मुक्त पहुंच मिल सकेगी। इन वस्तुओं पर पहले कुछ सीमा तक कस्टम ड्यूटी लगती थी, लेकिन अब ये ड्यूटी हटने से भारतीय सामान की प्रतिस्पर्धा बढ़ने की उम्मीद है।
CEPA के तहत केवल डयूटी-फ्री माल ही नहीं बल्कि सेवाओं और निवेश में भी आसानियां मिलेंगी। उदाहरण के लिए ओमान ने प्रमुख सर्विस सेक्टरों में भारतीय कंपनियों को 100 % प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की अनुमति देने का प्रावधान रखा है, जिससे IT, प्रोफेशनल सर्विसेज और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों को भी फायदा हो सकता है।
साथ ही इस समझौते में आयुर्वेद और आयुष उत्पादों के लिए भी ओमान में बाजार खोलने का अवसर देखा जा रहा है। CEPA आयुर्वेदिक दवाओं और स्वास्थ्य-कल्याण से जुड़ी वस्तुओं को भी तेलीबीन खाड़ी में नए ग्राहकों तक पहुंचाने में मदद कर सकता है।
Bilateral trade (दो-तरफ़ा व्यापार) पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में लगभग $10.6 बिलियन रहा था, जिसमें भारत ने ओमान को करीब $4 बिलियन का सामान निर्यात किया था। इस समझौते से अनुमान है कि भारतीय निर्यात में अगले दो-तीन साल में करीब 50 % तक वृद्धि देखने को मिल सकती है।
ओमान की बाजार तक आसान पहुंच से छोटे और मध्यम उद्योग, कृषि-उत्पादक, फार्मा कंपनियां और आयुष उत्पादक भारत के निर्यात को और मजबूत कर सकते हैं। साथ ही सेवाओं और पेशेवरों के लिए open mobility और निवेश के अवसर भी बढ़ेंगे, जिससे दोनों देशों के आर्थिक रिश्ते और गहरे हो सकते हैं।
इस डील से भारत के व्यापार को सिर्फ खाड़ी क्षेत्र में नहीं बल्कि दुनियाभर में विस्तार मिलेगा, और ओमान की भू-रणनीतिक स्थिति इसे अफ़्रीका, यूरोप और पूर्वी बाजारों तक पहुंचाने वाला नया गेटवे भी बना सकती है।