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मौलाना शम्सुल हुदा खान पर ED कार्रवाई, ब्रिटिश नागरिक रहकर वोट डाला

मौलाना शम्सुल हुदा खान पर ED कार्रवाई, ब्रिटिश नागरिक रहकर वोट डाला

Last Updated Feb - 12 - 2026, 04:00 PM | Source : Fela News

ईडी ने संत कबीर नगर व आजमगढ़ में मौलाना शम्सुल हुदा खान से जुड़े परिसरों पर छापेमारी कर वित्तीय लेन-देन और संपत्ति जांच की है.यह कार्रवाई वेतन, पेंशन और वोट से
मौलाना शम्सुल हुदा खान पर ED कार्रवाई
मौलाना शम्सुल हुदा खान पर ED कार्रवाई

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 11 फरवरी 2026 को उत्तर प्रदेश के संत कबीर नगर और आजमगढ़ में ब्रिटिश नागरिक मौलाना शम्सुल हुदा खान के ठिकानों पर छापेमारी की. ED की यह कार्रवाई मनी-लॉन्ड्रिंग के आरोपों की जांच के तहत की जा रही है, जिनके बारे में यूपी पुलिस की जालसाजी व धोखाधड़ी की एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की गई थी.

सूत्रों के मुताबिक शम्सुल हुदा ने 2013 में अपनी भारतीय नागरिकता त्याग कर ब्रिटिश नागरिकता ग्रहण कर ली थी, लेकिन इसके बावजूद वह 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में वोट डालने भारत आया था. उसके 2017 तक सरकारी वेतन तथा 2023 तक पेंशन का लाभ उठाने के भी गंभीर आरोप हैं.

जांच में यह भी सामने आया है कि शम्सुल हुदा ने अपनी विदेशी नागरिकता छिपाकर एनजीओ और व्यक्तिगत बैंक खातों के माध्यम से करोड़ों रुपये का अवैध लेन-देन किया. 2013 से 2017 के बीच उसके और उसकी संस्थाओं के खातों में लगभग 5.28 करोड़ रुपये जमा हुए, जिनमें से लगभग 3.83 करोड़ रुपये सीधे उसके निजी खातों में आए. इसी तरह रजा फाउंडेशन व कुल्लियातुल बनातिर रजविया जैसे संस्थाओं के नाम पर भी फंड रूट किए जाने के आरोप हैं. इन धनराशियों का इस्तेमाल कथित तौर पर मदरसों के निर्माण और अचल संपत्तियों की खरीद में किया गया.

ईडी की जांच में यह भी पता चला कि शम्सुल हुदा खान ने पाकिस्तान, बांग्लादेश और कई इस्लामिक देशों की यात्राएं कीं, और दान के नाम पर जुटाए गए फंड का इस्तेमाल व्यक्तिगत लाभ के लिए किया गया है या नहीं, इसकी भी जांच की जा रही है. छापेमारी के दौरान 17 अचल संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज मिले हैं, जिनकी बाजार में वर्तमान कीमत लगभग 20 करोड़ रुपये आंकी गई है, जबकि उनके खरीद मूल्य केवल करीब 3 करोड़ रुपये दर्ज हैं. कुल मिलाकर उसके लगभग 33 करोड़ रुपये की संपत्तियाँ अलग-अलग नामों पर पाई गई हैं.

ईडी ने सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, HDFC और SBI सहित कई बैंकों के खातों की भी गहन जांच की है. 2007 से 2025 के बीच हुए वित्तीय लेन-देन से पता चलता है कि नागरिकता खत्म होने के बाद भी सरकारी खजाने से पैसा लिया गया था. शम्सुल हुदा 1984 से 2013 तक मदरसा शिक्षक के रूप में कार्यरत रहा. ED अब आगे की कानूनी प्रक्रिया और अपराध की कमाई (Proceeds of Crime) के पूरे विस्तार की जांच कर रही है.

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