Last Updated Feb - 12 - 2026, 05:20 PM | Source : Fela News
भारत में 12 फरवरी 2026 को संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) और देशभर के केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने भारत बंद का आह्वान किया है, जिसमें नई श्रम संहिताओं, हालिया भारत‑अमे
संयुक्त किसान मोर्चा और केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने गुरुवार को राष्ट्रव्यापी हड़ताल और भारत बंद का बुलावा दिया, जिसका उद्देश्य भारत‑अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौता, केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए नए श्रम कोड (लेटेस्ट लेबर कोड्स), बिजली विधेयक‑2025 तथा बीज विधेयक‑2025 जैसे विधेयकों के खिलाफ जनता की आवाज उठाना है.
रिपोर्ट के अनुसार, किसान संगठनों का आरोप है कि नए बिजली विधेयक और बीज कानून से आम उपभोक्ता तथा कृषि क्षेत्र को नुकसान होगा और इससे बहुराष्ट्रीय कंपनियों का दबदबा बढ़ेगा. SKM ने इन नीतियों को किसानों की आजीविका पर सीधा प्रभाव डालने वाला बताया है.
किसान और मजदूर संगठन VB‑G RAM G एक्ट‑2025 को भी नरेगा के विकल्प के रूप में अस्वीकार कर रहे हैं और पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने तथा न्यूनतम मजदूरी लागू करने की मांग कर रहे हैं. SKM ने किसानों से अपील की है कि वे बड़े पैमाने पर विरोध कार्यक्रमों में भाग लें और मजदूर संगठनों के साथ एकजुटता दिखाएं.
ट्रेड यूनियनों का मानना है कि इन नए श्रम कानूनों से श्रमिकों के अधिकार कमजोर होंगे और नौकरी सुरक्षा प्रभावित होगी, जिससे नियोक्ताओं को अनुबंध के आधार पर कर्मचारियों को नियुक्त और हटाने में सुविधा मिलेगी. इन संगठनों का दावा है कि यह जनहित से जुड़ी नीतियों की उपेक्षा है.
कई विपक्षी दलों ने भी इस भारत बंद का समर्थन किया है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने ट्वीट कर कहा कि देशभर में लाखों किसान और मजदूर सरकार की नीतियों के खिलाफ सड़कों पर हैं और इन मुद्दों पर सुनवाई की आवश्यकता है. उन्होंने यह भी लिखा कि मजदूरों और किसानों के भविष्य से जुड़े फैसलों में उनकी आवाज को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए.
पंजाब की सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (AAP) ने भी बंद का समर्थन किया है और कहा है कि केंद्र सरकार के नए लेबर कोड्स श्रमिकों की नौकरी सुरक्षा छीनते हैं और कॉर्पोरेट हितों को बढ़ावा देते हैं. AAP ने कार्यकर्ताओं को किसानों और मजदूरों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर विरोध प्रदर्शन में भाग लेने के लिए कहा है.
हालांकि रिपोर्ट में अलग‑अलग क्षेत्रों में बंद के प्रभावों का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है, पर ट्रेड यूनियनों और किसान संगठनों के इस संयुक्त आह्वान को देशभर में व्यापक समर्थन मिल रहा है. इससे बैंकिंग, परिवहन और अन्य सेवाओं पर प्रभाव की संभावनाएं बनी हुई हैं.
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