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ओवैसी का खेल बिगाड़ेगा तेजस्वी का सपना? अंदरूनी सियासत खुली

ओवैसी का खेल बिगाड़ेगा तेजस्वी का सपना? अंदरूनी सियासत खुली

Last Updated Feb - 25 - 2026, 03:02 PM | Source : Fela News

बिहार की राजनीति में राजद के सामने नई चुनौतियों का विश्लेषण किया गया है। रिपोर्ट में बताया गया कि ओवैसी फैक्टर और गठबंधन समीकरण तेजस्वी यादव की रणनीति को लंबे समय तक प्रभावित कर सकते हैं।
ओवैसी का खेल बिगाड़ेगा तेजस्वी का सपना?
ओवैसी का खेल बिगाड़ेगा तेजस्वी का सपना?

बिहार की राजनीति में बदलते समीकरणों के बीच राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के लिए आने वाले वर्षों को चुनौतीपूर्ण बताया जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार पार्टी नेता तेजस्वी यादव को राजनीतिक रणनीति और गठबंधन संतुलन के मोर्चे पर कई स्तरों पर दबाव का सामना करना पड़ सकता है। इसमें खास तौर पर असदुद्दीन ओवैसी और उनकी पार्टी एआईएमआईएम की भूमिका को महत्वपूर्ण माना गया है।

बताया जा रहा है कि बिहार में मुस्लिम वोट बैंक पर पकड़ बनाए रखना आरजेडी की पारंपरिक राजनीतिक ताकत रही है, लेकिन ओवैसी की सक्रियता ने इस समीकरण को जटिल बना दिया है। सूत्रों के मुताबिक सीमांचल क्षेत्र में एआईएमआईएम की मौजूदगी ने पहले भी चुनावी परिणामों को प्रभावित किया था और भविष्य में भी इसका असर देखने को मिल सकता है।

रिपोर्ट के अनुसार राज्यसभा चुनाव और व्यापक राजनीतिक रणनीति के संदर्भ में यह चुनौती और स्पष्ट होती है। राजनीतिक विश्लेषण में कहा गया है कि गठबंधन राजनीति में सीट बंटवारे और नेतृत्व की भूमिका को लेकर संभावित मतभेद भी आरजेडी के लिए मुश्किलें बढ़ा सकते हैं। वहीं दूसरी ओर विपक्षी दलों के बीच तालमेल की स्थिति भी तेजस्वी यादव की राजनीतिक संभावनाओं को प्रभावित करने वाली बताई जा रही है।

इस बीच बिहार की राजनीति में सामाजिक समीकरणों का महत्व लगातार बना हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक जातीय और धार्मिक वोट पैटर्न में थोड़े बदलाव भी चुनावी परिणामों पर बड़ा असर डाल सकते हैं। ऐसे में एआईएमआईएम की रणनीति आरजेडी के लिए सीधे मुकाबले से ज्यादा वोट कटाव का खतरा पैदा कर सकती है।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि आने वाले पांच वर्षों में तेजस्वी यादव को संगठन मजबूती, गठबंधन प्रबंधन और क्षेत्रीय संतुलन पर एक साथ काम करना होगा। इसके अलावा राष्ट्रीय स्तर की राजनीति में भूमिका और संसद के उच्च सदन राज्यसभा से जुड़े समीकरण भी महत्वपूर्ण बताए जा रहे हैं।

रिपोर्ट के अनुसार कुल मिलाकर स्थिति यह संकेत देती है कि ओवैसी फैक्टर और गठबंधन चुनौतियां आरजेडी नेतृत्व के लिए लंबे समय तक राजनीतिक दबाव बनाए रख सकती हैं, जिसका असर भविष्य की चुनावी रणनीति पर भी दिखाई दे सकता है।

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