Last Updated Nov - 24 - 2025, 12:02 PM | Source : Fela News
Bhajan Clubbing: भजन क्लबिंग एक नया ट्रेंड है जिसमें मंत्र और कीर्तन को मॉडर्न अंदाज़ में पेश किया जाता है. GEN Z अब EDM की जगह भजनों की धुन पर थिरकना पसंद कर र
Bhajan Clubbing: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में युवाओं का ध्यान पारंपरिक पूजा-पाठ से हटकर क्लब, पार्टी और नाइट-आउट की ओर ज्यादा जा रहा है. लेकिन इसी बीच एक ऐसा ट्रेंड सामने आया है जिसने अध्यात्म को नए और मजेदार रूप में युवाओं तक पहुंचा दिया—भजन क्लबिंग.
भजन क्लबिंग क्या है?
भजन क्लबिंग एक मॉडर्न स्पिरिचुअल ट्रेंड है, जहां भजन, मंत्र और कीर्तन को क्लब जैसी लाइट्स, DJ बीट्स और एनर्जी के साथ पेश किया जाता है. यहां लोग डांस फ्लोर पर नहीं, बल्कि ‘डिवोशन फ्लोर’ पर भजन की धुनों पर झूमते हैं. यही वजह है कि GEN Z इसे खूब पसंद कर रही है.
कैसे शुरू हुआ यह ट्रेंड?
युवाओं में स्ट्रेस, ओवरथिंकिंग और करियर प्रेशर बढ़ने के साथ मानसिक शांति की खोज भी बढ़ी. इसी के चलते आध्यात्म को मॉडर्न स्टाइल में पेश करने का आइडिया आया और भजन क्लबिंग का ट्रेंड सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. यह धीरे-धीरे एक बड़ा मूवमेंट बन गया.
भजन क्लबिंग में क्या होता है?
यह एक नशा-मुक्त और सुरक्षित स्पेस होता है, जहां लोग साथ बैठकर भजन गाते हैं, मंत्रोच्चारण करते हैं और पॉजिटिव वाइब्स महसूस करते हैं. युवा अब घर या मंदिर में नहीं, बल्कि कैफे, बैंकेट हॉल और कम्युनिटी स्पेस में बड़े ग्रुप के साथ भजन पर झूमते हैं.
यहां शराब की जगह चाय होती है, और तेज पार्टी सॉन्ग की जगह भजन बजते हैं.
GEN Z क्यों हो रही है आकर्षित?
स्पिरिचुअलिटी का कूल रूप: भजन और मंत्र जब DJ लाइट्स और बीट्स के साथ मिलते हैं, तो युवाओं को यह ज्यादा रिलेटेबल लगता है.
स्ट्रेस-रिलीफ: यहां कोई नकारात्मक माहौल या नशा नहीं होता. मंत्रोच्चारण और भजन मानसिक शांति देते हैं.
कम्युनिटी कनेक्शन: अनजान लोग भी एक परिवार जैसा माहौल महसूस करते हैं.
परंपरा + आधुनिकता: यह ट्रेंड युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ते हुए भी मॉडर्न फील देता है.
सकारात्मक पक्ष
युवाओं को आध्यात्म से जुड़ने का नया तरीका देता है.
एक तनाव-मुक्त और पॉजिटिव माहौल बनाता है.
नशा-मुक्त और सुरक्षित स्पेस मिलता है.
सामाजिक जुड़ाव बढ़ता है.
नकारात्मक पक्ष
कुछ लोग इसे आध्यात्म को मनोरंजन की तरह पेश करने वाला ट्रेंड मानते हैं.
तेज म्यूजिक और लाइट्स के कारण भजन और मंत्रों की गहराई कम महसूस हो सकती है.
कई युवा इसे सिर्फ फैशन की तरह अपनाते हैं, असली आध्यात्म समझकर नहीं.
टिकट, स्पॉन्सरशिप और महंगे इवेंट्स से धर्म का व्यवसायीकरण बढ़ने की चिंता रहती है.
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