Last Updated Feb - 25 - 2026, 05:42 PM | Source : Fela News
आसान मुद्रा में बैठकर फर्श पर खाना सिर्फ परंपरा नहीं बल्कि सेहत के कई फायदे देता है। एक्सपर्ट बताते हैं यह कैसे पाचन, मानसिक संतुलन और शरीर को लाभ पहुंचाता है।
हम अपने खाने के अनुभव में अक्सर टेबल और कुर्सियों को प्राथमिकता देते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि फर्श पर बैठकर खाना खाने के स्वास्थ्य को भी फायदा पहुंचा सकता है? कई पुराने लोकजीवन में फर्श पर भोजन करना आम बात रही है, और सिर्फ संस्कृति या परंपरा की वजह से ही नहीं, बल्कि इसके कुछ वास्तविक वैज्ञानिक और फायदेमंद पहलू भी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सलाद, दाल-चावल, रोटी या थाली-जो भी भोजन हो– खाना खाते समय सही मुद्रा अपनाना शरीर के लिए कई तरीकों से सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।
सबसे पहले, फर्श पर बैठकर खाने से शरीर की मुद्रा (posture) बेहतर होती है। जब हम जमीन पर क्रॉस लेग (अपोलो पोज़) या वज्रासन की मुद्रा में बैठते हैं, तो रीढ़ की हड्डी सीधी रहती है तथा पेट पर कम दबाव पड़ता है। इस स्थिति में डायफ्राम और पेट की मांसपेशियों का काम संतुलित होता है, जिससे पाचन क्रिया तेज और सुचारु होती है। भोजन के बाद भारीपन, गैस या एसिडिटी जैसी समस्याएँ कम महसूस होती हैं क्योंकि शरीर का पाचन तंत्र सही ढंग से काम करता है।
इसके अलावा, फर्श पर बैठकर खाने से धीरज और मनोबल में भी सुधार आता है। जमीन पर बैठने से सांसों की लय संतुलित होती है और मांसपेशियाँ आराम की स्थिति में आती हैं, जिससे दिमाग शांत और भोजन ग्रहण करने का अनुभव अधिक mindful बनता है। यही वजह है कि कुछ योग विशेषज्ञ मानते हैं कि फर्श पर बैठे भोजन करने से हम अपना भोजन अधिक "स्वाद और शांति के साथ ग्रहण करते हैं, बजाय कि तेज़ी से बैठे खड़े खा लेने के।
एक और पहलू यह है कि फर्श पर भोजन करने से शरीर के मांसपेशियों का उपयोग बढ़ता है। कुर्सी पर बैठे रहने से शरीर की कुछ हिस्सों को स्थिरता मिलती है, लेकिन जमीन पर बैठने से नितम्ब, पेट और पीठ की मांसपेशियों को सक्रिय रूप से संतुलन बनाये रखना पड़ता है। यह एक प्रकार का हल्का व्यायाम भी बन जाता है, जो शरीर को सक्रिय रखता है।
साथ ही, भारत जैसे देश में फर्श पर भोजन करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। यह सिर्फ भोजन ग्रहण करने की क्रिया नहीं, बल्कि समय-समय पर संपूर्ण पारिवारिक एकता और संस्कार से भी जुड़ी रही है। भोजन की थाली फर्श पर फैलते-बैठते साझा करना, बातचीत करना और साथ में खाना-इन सभी का अपना एक सामाजिक और मनोवैज्ञानिक महत्त्व रहा है।
विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि धीरे-धीरे और शांतिपूर्वक भोजन करना पाचन और भूख दोनों के संकेतों को शरीर तक बेहतर तरीके से पहुँचाता है। टेबल पर बैठे रहने पर हम अक्सर मोबाइल, टीवी या बातचीत की ओर ध्यान भटकाते हैं, जिससे भोजन जल्दी समाप्त हो जाता है और भूख के सिग्नल ठीक से नहीं मिलते। वहीं फर्श पर बैठकर भोजन करने का अनुभव अधिक ध्यान केंद्रित और सावधान बनाता है।
हालांकि, यह ध्यान रखना भी ज़रूरी है कि किसी भी मुद्रा में बैठकर खाना तभी लाभदायक होता है जब उसे आरामदायक और सुरक्षित वातावरण में किया जाए। अगर किसी व्यक्ति को शारीरिक तकलीफ़ या जोड़ों से जुड़ी समस्या है, तो उसे किसी समर्थित बैठने की मुद्रा का विकल्प अपनाना चाहिए। फर्श पर ज़मीन पर बैठकर खाने का लाभ तभी मिलेगा जब आप इसे आराम से और सकारात्मक सोच के साथ करें।
कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि फर्श पर बैठकर खाना सिर्फ पुरानी परंपरा नहीं है, बल्कि शारीरिक, मानसिक और सामाजिक स्वास्थ्य के लिए कई फायदे भी प्रदान करता है। अगर आप रोज़ाना कम से कम एक बार फर्श पर बैठकर धीरे-धीरे खाना खाएँ, तो पाचन, मनोस्थिति और खाने के अनुभव में फर्क महसूस होना शुरू हो सकता है।
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