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क्यों कहा गया ‘ओडीआई से संन्यास लेते टेस्ट क्रिकेट से नहीं’...

क्यों कहा गया ‘ओडीआई से संन्यास लेते टेस्ट क्रिकेट से नहीं’...

Last Updated Nov - 25 - 2025, 02:46 PM | Source : Fela News

ओडीआई से संन्यास की घोषणा के साथ ही खिलाड़ी ने साफ कहा कि वह टेस्ट क्रिकेट नहीं छोड़ रहे। बयान ने करियर रणनीति, फिटनेस और टीम संतुलन पर नई बहस छेड़ दी है।
क्यों कहा गया ‘ओडीआई से संन्यास लेते टेस्ट क्रिकेट से नहीं’...
क्यों कहा गया ‘ओडीआई से संन्यास लेते टेस्ट क्रिकेट से नहीं’...

जब Shreevats Goswami ने कहा कि Virat Kohli को ओडीआई से संन्यास लेना था, लेकिन टेस्ट क्रिकेट में बने रहना चाहिए था, तो ऐसा नहीं सिर्फ व्यक्तिगत राय थी—बल्कि उसका दायरा उस वक्त की भारतीय टीम की चिंताओं तक फैला हुआ था। भारत और South Africa national cricket team के बीच दूसरी टेस्ट सीरीज़ में जब टीम दूसरी पारी में धड़ाम हुई, तो यह टिप्पणी ताज़ा हो गई।

गुवाहाटी टेस्ट में भारतीय टीम पहली पारी में मात्र 201 रन बना सकी, जबकि दक्षिण अफ्रीका ने पहले मौका पाकर बढ़त हासिल कर ली।  इसी संदर्भ में Goswami ने ट्विटर (X) पर लिखा कि,

“Ideally Virat should have left playing ODIs & continued playing Test cricket until he had nothing to give. Test cricket misses him.”

वे यह नहीं कह रहे थे कि Kohli का कॅरियर बुरा था, बल्कि यह कि टेस्ट क्रिकेट में उनकी उपस्थिति और जो मानसिकता उन्होंने टीम में लाई थी, वह अब टीम में नहीं दिख रही।

माँगा जा रहा प्रश्न यह है कि एक खिलाड़ी के जाने से टीम पर इतना असर क्यों पड़ रहा है? Goswami के मुताबिक, Kohli ने टीम को यह विश्वास दिलाया था कि किसी भी हालात में जीत संभव है, जिससे टीम का आत्म-विश्वास बढ़ता था।  आज जब नेतृत्व बदल चुका है, बड़े अनुभवी खिलाड़ी बाहर जा चुके हैं या अन्य प्रारूपों में सक्रिय नहीं हैं, तब भारतीय टीम को यह खालीपन महसूस हो रहा है।

इसके अलावा कहना यह भी था कि टेस्ट क्रिकेट में चुनौती अलग होती है, लंबी पारी, परिस्थिति के हिसाब से बदलती रणनीति, मानसिक दृढ़ता, और Kohli ने इन पहलुओं में टीम को पहले संभाला था। अब टीम में बदलावों के कारण स्थिरता और अनुभव की कमी बतायी जा रही है।

यानी संक्षिप्त में कहा जाए तो, Goswami का यह बयान सिर्फ Kohli के संन्यास पर नहीं, बल्कि उस मानसिकता, उस भरोसे और उस स्थायित्व पर है जो Kohli के दौर में टीम में था और जिसे आज टीम खोज रही है। अकेला खिलाड़ी बदल जाना काफी नहीं होता; उसकी मौजूदगी ने जो भूमिका निभाई थी, उसे भरने में वक्त लगता है, और आज भारतीय टेस्ट टीम उसी दौर से गुजर रही है।

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