Last Updated Jan - 16 - 2026, 01:39 PM | Source : Fela News
अमेरिका ने दुनिया भर में अलग-अलग मोर्चों पर ऐसे कदम उठाए हैं, जिससे चीन समेत कई महाशक्तियों की चिंता बढ़ गई है। इन कदमों को अब ‘तीन ब्रह्मास्त्र’ कहा जा रहा है।
वैश्विक राजनीति में हाल के दिनों में जो तस्वीर बन रही है, वह बेहद तनावपूर्ण है। अमेरिका ने वेनेजुएला, ईरान और ग्रीनलैंड को अपने रणनीतिक मोर्चों के रूप में चुना है, और इन देशों में उठाए गए कदमों के कारण चीन की टेंशन बढ़ गई है। कई विश्लेषक इसे अमेरिका की रणनीतिक चाल मान रहे हैं, जिसका सीधा असर चीन की वैश्विक नीतियों पर पड़ रहा है।
पहला ‘ब्रह्मास्त्र’ वेनेजुएला पर अमेरिका की कार्रवाई रही है। अमेरिका ने 3 जनवरी 2026 को एक बड़े सैन्य ऑपरेशन के तहत वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को काबू कर लिया। इसके साथ ही अमेरिकी नौसेना और सैनिकों की मौजूदगी को बढ़ाया गया और तेल संसाधनों को अपने पक्ष में करने की कोशिश भी शुरू की गई। इससे चीन और रूस दोनों ने कड़ी आलोचना की है, क्योंकि वेनेजुएला में उनका निवेश और सहयोग रहा है।
दूसरा ‘ब्रह्मास्त्र’ ईरान को लेकर अमेरिका की रुख प्रणाली है। ईरान पर आर्थिक प्रतिबंधों और सैन्य दबाव के चलते चीन ने अमेरिका से सावधान रहने की अपील की है और सैन्य शक्ति के उपयोग से परहेज करने की बात कही है। ईरान संकट ने चीन को खासतौर पर चिंतित किया है क्योंकि इससे मध्य पूर्व में ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार प्रभावित हो सकता है।
तीसरा और सबसे विवादित रणनीतिक कदम ग्रीनलैंड को लेकर है। अमेरिका ने खुलकर कहा है कि वह ग्रीनलैंड पर नियंत्रण चाहता है, जो आज डेनमार्क का हिस्सा है, लेकिन इसमें मौजूद दुर्लभ खनिज और समुद्री मार्ग उसकी भू-राजनीतिक महत्वता को और बढ़ा देते हैं। इस क्षेत्र में नाटो और अन्य यूरोपीय देशों की सैन्य मौजूदगी भी बढ़ी है, जिससे यह तनाव और गहरा गया है।
चीन इन तीनों मोर्चों पर अमेरिका की झलक को सिर्फ बुनियादी कदम नहीं मान रहा। वह इसे अपनी वैश्विक पहुंच और प्रभाव को चुनौती देने वाला कदम बता रहा है। चीन ने अमेरिका से कई बार कहा है कि किसी भी क्षेत्रीय देश के आंतरिक मामलों में दखल देना ‘अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन’ है, खासकर वेनेजुएला में तेल टैंकरों को जब्त करने की घटना के बाद अमेरिका-चीन संबंधों में कड़वाहट और बढ़ी है।
इन घटनाओं ने वैश्विक व्यवस्था को फिर से सवालों के घेरे में ला दिया है कि क्या यह महाशक्तियों के बीच टकराव का नया दौर है। चीन फिलहाल सीधे सैन्य टकराव से बच रहा है, लेकिन तनाव कई मोर्चों पर बना हुआ है। विश्लेषकों का कहना है कि इस स्थिति का असर न सिर्फ इन देशों पर, बल्कि दुनिया के आर्थिक, ऊर्जा और सुरक्षा समीकरणों पर भी पड़ेगा।
अमेरिका के ये ‘तीन ब्रह्मास्त्र’ नामक कदम राजनीतिक रणनीति के तौर पर देखे जा रहे हैं, लेकिन सवाल यह है कि इसके परिणाम आने वाले दिनों में किस दिशा में जाएंगे और वैश्विक शक्ति संतुलन पर क्या असर डालेगी।
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