Last Updated Jan - 16 - 2026, 01:25 PM | Source : Fela News
व्हाइट हाउस में वेनेजुएला की विपक्षी नेता मचाडो ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपना नोबेल शांति पुरस्कार मेडल भेंट किया, और इसका बैकग्राउंड बेहद दिलचस्प
वेनेजुएला की जानी-मानी विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्हाइट हाउस में मुलाकात ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नया मोड़ ला दिया है। इस बैठक के दौरान मचाडो ने अपने 2025 के नोबेल शांति पुरस्कार का मेडल ट्रंप को सौंपा, जिसे ट्रंप ने स्वीकार भी किया। यह दृश्य तीन वजहों से सुर्खियों में है और दुनिया भर में चर्चा का विषय बना हुआ है।
पहली वजह है यह कदम कितना प्रतीकात्मक है। मचाडो ने यह मेडल ट्रंप को “उनके वेनेजुएला की आज़ादी के समर्थन” के लिए दिया, यह कहते हुए कि वह उनके ‘विशेष योगदान’ को सम्मानित करना चाहती हैं। ट्रंप ने भी इस भेंट को एक महान सम्मान बताया और मचाडो की बहादुरी की तारीफ की।
दूसरी वजह यह है कि नोबेल शांति पुरस्कार को वास्तविक रूप से ट्रांसफर नहीं किया जा सकता। नोबेल समिति ने स्पष्ट किया है कि जबकि मेडल भौतिक रूप से किसी को दिया जा सकता है, “नोबेल शांति पुरस्कार का खिताब (लॉरेल)” केवल पुरस्कार पाने वाले के नाम पर ही रहता है। इससे साफ है कि यह कदम सिर्फ प्रतीकात्मक सम्मान के लिए था, वास्तविक पुरस्कार ट्रंप का नहीं माना जाएगा।
तीसरी और शायद सबसे बड़ी वजह है राजनीतिक रूप से इसकी पृष्ठभूमि। वेनेजुएला में पिछले समय से चल रहे राजनीतिक संकट के बीच मचाडो ने यह कदम उठाया है। अमेरिका द्वारा निकोलस मादुरो को हटाने के बाद, ट्रंप ने अस्थायी राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज को समर्थन दिया है, न कि सीधी रूप से मचाडो को। ऐसे में मचाडो का यह कदम ट्रंप के समर्थन को पाने की एक कोशिश के रूप में देखा जा रहा है, ताकि वेनेजुएला की राजनीति में अपनी पकड़ मजबूत कर सकें।
इस मुलाकात के बाद मचाडो ने समर्थकों के बीच कहा कि वे “हम ट्रंप पर भरोसा कर सकते हैं”, और कुछ लोगों ने उनके लिए जयकार भी लगाई। वहीं, आलोचकों का कहना है कि यह कदम अधिक राजनीतिक और रणनीतिक था, न कि शांति पुरस्कार के असली मायने को दर्शाने वाला।
इस पूरी घटना ने वैश्विक स्तर पर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या शांति जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कार को राजनीतिक संदेश के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है, या यह वास्तव में किसी गहरे सहयोग का प्रतीक है। ट्रंप और मचाडो की यह बैठक अब दुनिया के राजनीतिक विश्लेषकों की नज़र में एक बड़ा विषय बन चुकी है।
यह भी पढ़ें: