Last Updated Jan - 16 - 2026, 03:49 PM | Source : Fela News
ईरान में भारी विरोध प्रदर्शन के बीच अमेरिका ने दावा किया है कि 800 लोगों की फांसी की सज़ा रोक दी गई है। व्हाइट हाउस ने इसे ‘ट्रंप की चेतावनी का असर’ बताया है, ज
हाल के दिनों में ईरान में सरकार-विरोधी प्रदर्शनों के दौरान हिंसा और मौतों की संख्या बढ़ती चली गई थी। मानवाधिकार समूहों के मुताबिक सुरक्षा बलों की कार्रवाई में हजारों लोग मारे जा चुके हैं। इसी बीच ईरानी प्रशासन पर हिंसा और दमन के लिए लगातार अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ रहा था।
व्हाइट हाउस ने गुरुवार को पत्रकारों को बताया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी टीम ने ईरानी अधिकारियों को “गंभीर परिणाम” के संकेत के साथ चेतावनी दी थी कि अगर प्रदर्शनकारियों के विरोध और दमन के खिलाफ कार्रवाई जारी रही तो अमेरिका कठोर कदम उठा सकता है। इसके बाद ईरान के पास तय 800 फांसी की सज़ाएं रोक दी गईं हैं, जिनका आयोजन पिछले दिनों किया जा रहा था।
व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लीविट ने बताया कि “राष्ट्रपति को यह जानकारी मिली है कि कल होने वाली 800 फांसी की सज़ा को रोक दिया गया है। राष्ट्रपति और उनकी टीम इस पर करीब से नजर रखे हुए हैं और सभी विकल्प खुले हैं।” उसने यह भी कहा कि ट्रंप ने ईरानी शासन को स्पष्ट संदेश दिया कि अगर हत्या और फांसी जारी रहेंगे तो इसके गंभीर परिणाम होंगे
ट्रंप ने स्वयं कहा कि उन्हें बताया गया है कि हत्या और फांसी रुक गई है और कोई बड़ी संख्या में लोगों को इसकी सज़ा नहीं दी जाएगी, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका स्थिति को “देखता रहेगा” और भविष्य के कदम पर नजर रखेगा।
विश्लेषकों के मुताबिक यह फैसला ईरान-अमेरिका के बीच तनाव को कम करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि सऊदी अरब, क़तर और ओमान जैसे मध्य पूर्व के देशों ने भी कूटनीतिक दबाव बढ़ाकर किसी बड़े संघर्ष को टालने में भूमिका निभाई है।
हालांकि ईरान की सरकार ने कई बार कहा है कि वह प्रदर्शनकारियों को “दंगाइयों” के रूप में देखती है और सख्त कार्रवाई का अधिकार रखती है, लेकिन अभी के लिए फांसी की कार्रवाई टल गई है, जो मानवाधिकार समूहों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए थोड़ी राहत की खबर है।
इस निर्णय से न केवल ईरान में बढ़ते तनाव को थोड़ी स्थिरता मिली है, बल्कि यह संकेत भी मिला है कि बड़ी फांसी की सज़ाएं रोककर किसी तरह की कूटनीतिक हलचल ने प्रभाव डाला है। हालांकि आगे क्या होगा और क्या यह फैसला स्थायी रहेगा, यह अभी देखने वाली बात है।
यह भी पढ़ें: