Last Updated Apr - 13 - 2026, 10:56 AM | Source : Fela News
US Iran Peace Talks In Pakistan: इस्लामाबाद वार्ता फेल होने के बाद ट्रंप का बड़ा बयान, कहा ईरान को नहीं होना चाहिए परमाणु हथियार, बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका का सख्त रुख सामने आया
इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हुई अहम शांति वार्ता के विफल होने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा और सख्त बयान सामने आया है। ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा है कि ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उनके इस बयान ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय तनाव को बढ़ा दिया है।
पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका स्थिति को किसी भी अन्य देश से बेहतर समझता है और वह इस मुद्दे पर पूरी तरह स्पष्ट है। उन्होंने दोहराया, “ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होंगे, यह संभव ही नहीं है।” ट्रंप के मुताबिक, इस्लामाबाद में हुई बातचीत के दौरान भी ईरान ने अपने इरादे जाहिर कर दिए थे कि वह परमाणु क्षमता हासिल करना चाहता है, जिसे अमेरिका किसी भी हाल में स्वीकार नहीं करेगा।
बातचीत फिर से शुरू होने की संभावना पर ट्रंप ने बेहद बेपरवाह अंदाज में प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात की कोई परवाह नहीं है कि ईरान दोबारा बातचीत के लिए आता है या नहीं। “अगर वे बातचीत के लिए वापस आते हैं तो ठीक है, अगर नहीं आते हैं तो भी मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता,” ट्रंप ने साफ कहा। उनके इस बयान को अमेरिका के सख्त और आत्मविश्वासी रुख के तौर पर देखा जा रहा है।
ट्रंप ने ईरान की मौजूदा स्थिति को लेकर भी बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि हालिया संघर्ष के बाद ईरान की सैन्य ताकत काफी कमजोर हो चुकी है और अब उसके पास कोई मजबूत विकल्प नहीं बचा है। ट्रंप के मुताबिक, ईरान की नौसेना और वायुसेना को भारी नुकसान हुआ है और उसके कई जहाज भी नष्ट हो चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान अब पहले जैसी स्थिति में नहीं है और उसकी रणनीतिक ताकत काफी हद तक खत्म हो चुकी है।
इससे पहले एक इंटरव्यू में ट्रंप ने यह भी संकेत दिया था कि ईरान की नेतृत्व व्यवस्था में बदलाव आया है। उन्होंने दावा किया कि हाल ही में जिन लोगों से बातचीत हुई, वे पहले की तुलना में अधिक समझदार और तेज-तर्रार थे। हालांकि, उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ईरान ने अपने संसाधनों का बड़ा हिस्सा हथियारों पर खर्च किया, लेकिन अमेरिकी कार्रवाई ने उन क्षमताओं को काफी हद तक कमजोर कर दिया।
ट्रंप ने ईरान के पुराने बयानों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ईरान लंबे समय से अमेरिका और इजरायल के खिलाफ तीखे बयान देता रहा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इस पर उतनी गंभीरता नहीं दिखाई, जितनी दिखानी चाहिए थी। उनके अनुसार, हालिया घटनाओं के बाद हालात पूरी तरह बदल गए हैं और अब दुनिया को इस मुद्दे पर गंभीरता से ध्यान देना होगा।
कुल मिलाकर, इस्लामाबाद वार्ता की विफलता के बाद ट्रंप का यह बयान साफ संकेत देता है कि अमेरिका ईरान के खिलाफ अपने रुख में कोई नरमी नहीं बरतने वाला। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या दोनों देश फिर से बातचीत की टेबल पर लौटते हैं या तनाव और बढ़ता है।
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