Last Updated Jan - 27 - 2026, 11:25 AM | Source : Fela News
इस देश में न घर-घर इंटरनेट है, न टीवी की आदत । सरकारी पाबंदियों और इतिहास ने इसे आधुनिक डिजिटल दुनिया से अलग-थलग कर दिया है।
आज जब दुनिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, 5G और स्मार्ट टेक्नोलॉजी की बात कर रही है, उसी दौर में एक ऐसा देश भी मौजूद है जो आज भी लगभग 1950 के दशक जैसी जिंदगी जी रहा है। यहां न इंटरनेट आम है, न टीवी हर घर में मिलता है और न ही मोबाइल डेटा रोजमर्रा की जरूरत माना जाता है। इस देश का नाम है इरिट्रिया, जो अफ्रीका के हॉर्न क्षेत्र में स्थित है।
इरिट्रिया की सबसे चौंकाने वाली बात इसकी डिजिटल दुनिया से दूरी है। यहां इंटरनेट बेहद सीमित है और आम लोग इसे घर बैठे इस्तेमाल नहीं कर सकते। राजधानी अस्मारा में कुछ गिने-चुने इंटरनेट कैफे हैं, जहां तक पहुंचने के लिए लोगों को कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। मोबाइल डेटा लगभग न के बराबर है और किसी को मैसेज भेजने में 20-25 मिनट तक लग सकते हैं। टीवी भी आम नहीं है और ज्यादातर लोग रेडियो या आपसी बातचीत से ही खबरें जानते हैं।
हालांकि, इस तकनीकी कमी के बावजूद इरिट्रिया की जीवनशैली में एक अलग ही सादगी और खूबसूरती दिखाई देती है। बच्चे मोबाइल और टीवी स्क्रीन में उलझे नहीं रहते, बल्कि गलियों में खेलते हैं, पारंपरिक खेल सीखते हैं और सामाजिक गतिविधियों में हिस्सा लेते हैं। लोग अपने पड़ोसियों को जानते हैं, एक-दूसरे के सुख-दुख में शामिल होते हैं और समुदाय की भावना बहुत मजबूत है।
इरिट्रिया का इतिहास इसकी मौजूदा स्थिति को समझने में अहम भूमिका निभाता है। प्राचीन काल में यह क्षेत्र लाल सागर के किनारे बसे बंदरगाहों की वजह से व्यापार का बड़ा केंद्र था। अक्सुम साम्राज्य के दौर में यह इलाका आर्थिक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध माना जाता था। बाद में ओटोमन साम्राज्य, मिस्र और फिर इटली ने इस पर शासन किया। इटालियन शासन के दौरान शहरों को आधुनिक रूप मिला, लेकिन स्थानीय लोगों के लिए आज़ादी और अधिकार सीमित ही रहे ।
1950 में संयुक्त राष्ट्र के फैसले के तहत इरिट्रिया को इथियोपिया के साथ संघ में जोड़ा गया, लेकिन यह व्यवस्था ज्यादा समय तक नहीं चल सकी। अधिकारों के हनन और सांस्कृतिक दमन के चलते इरिट्रिया में स्वतंत्रता आंदोलन शुरू हुआ, जो करीब तीन दशकों तक चला। 1993 में देश को आज़ादी तो मिली, लेकिन इसके बाद भी सख्त सरकारी नियंत्रण और सीमित व्यक्तिगत स्वतंत्रता बनी रही।
आज का इरिट्रिया तकनीक के मामले में भले ही पीछे नजर आता हो, लेकिन यहां का सामाजिक ढांचा मजबूत है। बाजार, गलियां और छोटे कैफे आज भी लोगों से भरे रहते हैं। लोग आमने-सामने बैठकर बातें करते हैं, रिश्तों को समय देते हैं और तेज़ रफ्तार जिंदगी से दूर एक अलग तरह का सुकून महसूस करते हैं।
इरिट्रिया सच में एक ऐसा देश है, जहां आधुनिक दुनिया की चमक कम है, लेकिन परंपरा, सामुदायिक जुड़ाव और सादगी आज भी जीवित है। यही वजह है कि इसे देखकर ऐसा लगता है मानो यह देश आज भी 1950 के दौर में जी रहा हो।
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