Last Updated Jan - 23 - 2026, 05:20 PM | Source : Feela News
दक्षिण कोरिया ने दुनिया का पहला AI बेसिक एक्ट लागू किया। पारदर्शिता बढ़ेगी, लेकिन सख्त नियमों से स्टार्टअप्स को इनोवेशन रुकने का डर सता रहा है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के तेजी से बढ़ते प्रभाव के बीच दक्षिण कोरिया ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। यूरोपियन यूनियन को पीछे छोड़ते हुए दक्षिण कोरिया ने दुनिया का पहला 'AI बेसिक एक्ट' पेश कर दिया है। इस कानून का उद्देश्य Al के इस्तेमाल को पारदर्शी, सुरक्षित और जवाबदेह बनाना है। हालांकि सरकार इसे भविष्य की जरूरत बता रही है, लेकिन देश के स्टार्टअप इकोसिस्टम में इसे लेकर बेचैनी साफ दिखाई दे रही है।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस कानून के जरिए दक्षिण कोरिया खुद को दुनिया की टॉप तीन AI महाशक्तियों में शामिल करना चाहता है। यह एक्ट उन क्षेत्रों पर खास ध्यान देता है जहां AI के गलत इस्तेमाल से बड़े जोखिम पैदा हो सकते हैं। इनमें परमाणु सुरक्षा, हेल्थकेयर, ट्रांसपोर्ट, पानी की सप्लाई और वित्तीय सेवाएं शामिल हैं। इन सेक्टर्स में AI सिस्टम पर इंसानी निगरानी अनिवार्य कर दी गई है।
AI बेसिक एक्ट के तहत कंपनियों को अपने ग्राहकों को पहले से यह जानकारी देनी होगी कि वे AI आधारित प्रोडक्ट या सर्विस का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके अलावा, AI से बनी तस्वीरों, वीडियो, टेक्स्ट या अन्य कंटेंट पर साफ लेबल या वॉटरमार्क लगाना अनिवार्य होगा। सरकार का मानना है कि AI जनरेटेड कंटेंट असली जैसा दिख सकता है, जिससे भ्रम, गलत सूचना और धोखाधड़ी का खतरा बढ़ जाता है।
हालांकि, इस कानून का सबसे ज्यादा असर स्टार्टअप्स पर पड़ता दिख रहा है। दक्षिण कोरियाई स्टार्टअप्स का कहना है कि सख्त नियम इनोवेशन को बढ़ावा देने के बजाय उसे धीमा कर सकते हैं। स्टार्टअप अलायंस के एक सर्वे के अनुसार, केवल 2 प्रतिशत AI स्टार्टअप्स के पास फिलहाल इस कानून के अनुरूप कोई औपचारिक अनुपालन योजना मौजूद है। करीब आधे स्टार्टअप्स ने यह भी स्वीकार किया कि वे कानून के कई प्रावधानों को पूरी तरह समझ नहीं पाए हैं।
स्टार्टअप अलायंस के सह-प्रमुख लिम जंग-वूक का कहना है कि संस्थापकों में यह सवाल आम है कि "हमें ही पहला क्यों बनना पड़ा?"। उनका मानना है कि कानून की अस्पष्ट भाषा डेवलपर्स को जरूरत से ज्यादा सतर्क बना सकती है, जिससे रिसर्च और नए प्रयोग प्रभावित होंगे।
सरकार ने इन चिंताओं को देखते हुए एक साल की छूट अवधि दी है। इस दौरान नियमों का पूरी तरह पालन न करने पर कंपनियों पर कोई प्रशासनिक जुर्माना नहीं लगेगा। इसके अलावा विज्ञान और आईसीटी मंत्रालय ने एक AI एक्ट सपोर्ट डेस्क भी शुरू किया है, जो कंपनियों को यह समझने में मदद करेगा कि उन पर कौन-से नियम लागू होते हैं।
अवधि खत्म होने के बाद नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर 30 मिलियन वॉन यानी करीब 20,400 डॉलर तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। सरकार का कहना है कि यह जुर्माना यूरोपीय संघ के प्रस्तावित AI कानूनों की तुलना में काफी कम है।
कुल मिलाकर, दक्षिण कोरिया का यह कदम AI के सुरक्षित और जिम्मेदार विकास की दिशा में बड़ा माना जा रहा है। लेकिन साथ ही यह भी साफ है कि सरकार के सामने स्टार्टअप्स की आशंकाओं को दूर करना और नवाचार के लिए संतुलित माहौल बनाए रखना एक बड़ी चुनौती होगी। दुनिया की नजर अब इस बात पर टिकी है कि पहला Al कानून भविष्य की तकनीकी दिशा को कैसे प्रभावित करता है।
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