Last Updated Jan - 27 - 2026, 12:35 PM | Source : Fela News
ईरान-अमेरिका तनाव के बीच यूएई ने बड़ा फैसला लिया है। उसने साफ कहा कि ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य कार्रवाई के लिए उसकी जमीन और हवाई क्षेत्र इस्तेमाल नहीं होंगे।
मध्य पूर्व में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव लगातार गहराता जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान को दी जा रही कड़ी चेतावनियों और सैन्य गतिविधियों के बीच अब संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने एक अहम और चौंकाने वाला फैसला लिया है। यूएई ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि वह ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य कार्रवाई के लिए न तो अपनी जमीन, न अपना हवाई क्षेत्र और न ही अपने समुद्री इलाकों का इस्तेमाल करने देगा। इस फैसले को क्षेत्रीय राजनीति में एक बड़े कूटनीतिक कदम के तौर पर देखा जा रहा है।
यूएई के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि देश मौजूदा हालात में पूरी तरह तटस्थ रहेगा और क्षेत्र में शांति, स्थिरता और संवाद को प्राथमिकता देगा। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि यूएई किसी भी ऐसे कदम का हिस्सा नहीं बनेगा, जिससे मध्य पूर्व में तनाव और बढ़े। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका ने हिंद महासागर में अपना USS अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप तैनात कर दिया है, जो सेंटकॉम (CENTCOM) के समुद्री क्षेत्र में सक्रिय है।
अमेरिका की बढ़ती सैन्य मौजूदगी को ईरान के लिए दबाव की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। इसी बीच अमेरिकी ड्रोन विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि ईरान की ड्रोन स्वार्म क्षमता अमेरिकी नौसेना के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि USS अब्राहम लिंकन फिलहाल ईरान के खिलाफ किसी तत्काल सैन्य कार्रवाई के लिए तैनात नहीं है, लेकिन हालात पर कड़ी नजर रखी जा रही है।
पिछले कुछ हफ्तों में ईरान के अंदर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए हैं, जिनमें भारी संख्या में लोगों के मारे जाने का दावा किया गया है। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, प्रदर्शन दबाने के दौरान हजारों लोगों की जान गई है। इन्हीं घटनाओं को लेकर अमेरिका ने ईरान पर लगातार दबाव बनाया और राष्ट्रपति ट्रंप ने यहां तक कह दिया कि एक नौसैनिक बेड़ा ईरान की दिशा में बढ़ रहा है। हालांकि, ट्रंप ने यह भी कहा कि उन्हें उम्मीद है कि सैन्य कार्रवाई की जरूरत नहीं पड़ेगी।
दिलचस्प बात यह है कि यूएई अकेला देश नहीं है जिसने अमेरिका को संयम बरतने की सलाह दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कतर, सऊदी अरब और ओमान जैसे प्रमुख क्षेत्रीय देशों ने भी अमेरिका से ईरान पर हमला न करने का आग्रह किया है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, इन कूटनीतिक प्रयासों में मिस्र भी शामिल रहा। वहीं, पाकिस्तानी अखबार डॉन ने ईरान में पाकिस्तान के राजदूत के हवाले से बताया कि ट्रंप ने तेहरान को यह संदेश दिया था कि अमेरिका फिलहाल हमला नहीं करेगा और ईरान से संयम बनाए रखने को कहा था।
इजराइली मीडिया चैनल N12 की रिपोर्ट में एक सऊदी अधिकारी के हवाले से कहा गया कि सऊदी अरब ने भी ट्रंप प्रशासन को चेताया है कि ईरान में सत्ता परिवर्तन की कोशिशें उलटा असर डाल सकती हैं। अधिकारी ने कहा कि बिना सोचे-समझे उठाया गया कोई भी कदम ईरानी शासन को और मजबूत कर सकता है।
यूएई का यह फैसला दिखाता है कि मध्य पूर्व के कई देश अब सीधे टकराव की राजनीति से दूरी बनाना चाहते हैं। ईरान-अमेरिका तनाव के बीच यूएई की तटस्थता न केवल उसके कूटनीतिक संतुलन को दर्शाती है, बल्कि यह भी संकेत देती है कि क्षेत्रीय देश अब युद्ध के बजाय स्थिरता और संवाद को तरजीह देना चाहते हैं।
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