Last Updated Feb - 28 - 2026, 11:43 AM | Source : Fela News
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से टैरिफ पर झटका लगने के बाद वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लटनिक अचानक दिल्ली पहुंचे। उन्होंने पीयूष गोयल से मुलाकात कर व्यापारिक रिश्तों पर अहम चर्चा की।
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा डोनाल्ड ट्रंप के ग्लोबल टैरिफ फैसले को अमान्य ठहराए जाने के बाद वैश्विक व्यापार जगत में हलचल तेज हो गई है। इसी बीच अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लटनिक का अचानक भारत दौरा कई मायनों में अहम माना जा रहा है। 26 फरवरी को लटनिक बिना अधिक पूर्व घोषणा के दिल्ली पहुंचे और केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल से मुलाकात की।
यह बैठक ऐसे समय हुई है जब अमेरिका में टैरिफ नीति को लेकर कानूनी और राजनीतिक बहस जारी है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 20 फरवरी को ट्रंप प्रशासन द्वारा अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम (IEEPA) के तहत लगाए गए ग्लोबल टैरिफ को रद्द कर दिया। इस फैसले को ट्रंप के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
दिल्ली में हुई बैठक के दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार और आर्थिक साझेदारी को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई। अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर और पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर इस मुलाकात की जानकारी साझा की। गोर ने इसे "सार्थक लंच मीटिंग" बताया और कहा कि अमेरिका और भारत के बीच सहयोग के कई अवसर मौजूद हैं। वहीं, गोयल ने कहा कि दोनों पक्षों ने व्यापारिक संबंधों को और विस्तार देने के तरीकों पर सकारात्मक चर्चा की।
हालांकि इस बैठक के विस्तृत एजेंडे को सार्वजनिक नहीं किया गया, लेकिन जानकारों का मानना है कि अमेरिका की टैरिफ नीति और उसके वैश्विक प्रभाव पर भी बातचीत हुई होगी। भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंध हाल के वर्षों में मजबूत हुए हैं। रक्षा, टेक्नोलॉजी, ऊर्जा और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा है।
टैरिफ विवाद की पृष्ठभूमि को समझना भी जरूरी है। ट्रंप प्रशासन ने 1974 के व्यापार अधिनियम की धारा 122 का हवाला देते हुए 10 प्रतिशत का नया वैश्विक टैरिफ लागू किया था और इसे बढ़ाकर 15 प्रतिशत करने की भी घोषणा की थी । हालांकि सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने इस नीति को कानूनी चुनौती दी है। फिलहाल 10 प्रतिशत टैरिफ 150 दिनों के लिए वैध बताया गया है, लेकिन इस पर अंतिम स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।
दिल्ली में बैठक के बाद लटनिक जोधपुर के लिए रवाना हो गए। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वह एक निजी समारोह में शामिल होने के लिए वहां गए थे। हालांकि राजनीतिक और आर्थिक विश्लेषक इस दौरे को केवल सामाजिक कार्यक्रम से जोड़कर नहीं देख रहे हैं। उनका मानना है कि भारत जैसे बड़े व्यापारिक साझेदार के साथ संवाद बनाए रखना अमेरिका के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, खासकर तब जब उसकी टैरिफ नीति पर सवाल उठ रहे हों।
भारत-अमेरिका संबंध वर्तमान समय में बहुआयामी हो चुके हैं। ऐसे में अमेरिकी वाणिज्य सचिव का अचानक दौरा इस बात का संकेत माना जा रहा है कि दोनों देश बदलते वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में सहयोग को और गहरा करना चाहते हैं। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि टैरिफ विवाद और व्यापारिक वार्ताओं का क्या परिणाम निकलता है।
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