Last Updated Apr - 14 - 2026, 12:43 PM | Source : Fela News
Iran War: ट्रंप की सख्त चेतावनी, ईरानी जहाज पास आए तो होगा तबाह; दावा- नेवी पहले ही खत्म, अमेरिका ने बंदरगाहों की घेराबंदी तेज कर बढ़ाया तनाव
अमेरिका ने ईरान पर दबाव बढ़ाते हुए उसके बंदरगाहों और समुद्री इलाकों के आसपास सख्त नाकेबंदी लागू कर दी है। इस मिशन के तहत 15 से ज्यादा जंगी जहाज तैनात किए गए हैं, जिनमें अत्याधुनिक युद्धपोत USS त्रिपोली (LHA-7) भी शामिल है, जो इस समय अरब सागर में सक्रिय है।
इस युद्धपोत पर 5वीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट F-35B लाइटनिंग II और MV-22 ओस्प्रे जैसे एडवांस एयरक्राफ्ट तैनात किए गए हैं, जो लगातार समुद्री इलाकों में निगरानी कर रहे हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमान (CENTCOM) के मुताबिक, भारतीय समयानुसार शाम 7:30 बजे से यह नाकेबंदी लागू कर दी गई।
CENTCOM ने साफ किया है कि यह कार्रवाई अरब खाड़ी, ओमान की खाड़ी और ईरानी तटीय क्षेत्रों में आने-जाने वाले जहाजों पर लागू होगी। हालांकि, गैर-ईरानी बंदरगाहों से आने-जाने वाले जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दी जाएगी।
अमेरिकी सेना ने बताया कि USS त्रिपोली को विशेष रूप से इस तरह डिजाइन किया गया है कि इसमें पारंपरिक वेल डेक नहीं होता, जिससे ज्यादा संख्या में F-35B फाइटर जेट्स और ओस्प्रे एयरक्राफ्ट तैनात किए जा सकते हैं। जरूरत पड़ने पर यह युद्धपोत 20 से अधिक फाइटर जेट्स को ऑपरेट करने में सक्षम है।
इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अगर कोई भी ईरानी जहाज इस नाकेबंदी के पास आता है, तो उसे तुरंत नष्ट कर दिया जाएगा। ट्रंप ने दावा किया कि युद्ध के दौरान ईरान की नौसेना का अधिकांश हिस्सा पहले ही खत्म हो चुका है और अब वह कोई बड़ा खतरा नहीं है।
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा कि ईरान के 150 से ज्यादा जहाज तबाह हो चुके हैं और जो बचे हैं, उन्हें भी जरूरत पड़ने पर निशाना बनाया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका किसी भी खतरे का जवाब “तेज और सख्त कार्रवाई” से देगा।
यह पूरा घटनाक्रम उस वक्त सामने आया है जब पाकिस्तान के इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता पूरी तरह विफल हो गई। उपराष्ट्रपति जेडी वैंस के नेतृत्व में गई अमेरिकी टीम कोई समझौता नहीं कर सकी, जिसके बाद ट्रंप ने ईरान के खिलाफ नाकेबंदी का ऐलान कर दिया।
कुल मिलाकर, मध्य-पूर्व में तनाव तेजी से बढ़ रहा है और अमेरिका की इस सैन्य कार्रवाई ने हालात को और गंभीर बना दिया है।
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