Last Updated Jan - 16 - 2026, 04:21 PM | Source : Fela News
ब्रिटेन की संसद में प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने कामसूत्र का जिक्र करते हुए विपक्ष पर तंज कस दिया, लेकिन यह टिप्पणी हाउस ऑफ कॉमन्स में बड़ा विवाद बन गई और आलोचन
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर हाल ही में संसद के प्राइम मिनिस्टर क्वेश्चन टाइम (PMQs) के दौरान विवाद में आ गए। विपक्षी नेता केमी बेडनोक्च ने सरकार पर नीतियों में बार-बार बदलाव करने और डिजिटल पहचान योजना पर यू-टर्न लेने का आरोप लगाया। जवाब में स्टार्मर ने कहा कि “पिछले 14 वर्षों में उन्होंने कामसूत्र से भी ज्यादा पोजिशन बदली हैं” — यह बयान सुनते ही संसद में कुछ समय के लिए सन्नाटा छा गया।
यह कामसूत्र वाला जिक्र दरअसल एक तंज था, जिसका मकसद विपक्ष की नीति-उलटफेर की आलोचना करना था। कामसूत्र एक प्राचीन भारतीय ग्रंथ है जिसका संबंध अनेक यौन पोजिशन से जोड़ा जाता है, और स्टार्मर ने इसे हास्यात्मक तंज के रूप में इस्तेमाल किया। हालांकि कई सांसदों ने इसे “गलत समय पर किया गया मजाक” बताया और कहा कि गंभीर मुद्दों पर चर्चा के दौरान ऐसी भाषा का इस्तेमाल ठीक नहीं है।
विपक्ष ने इस मौके का तुरंत फायदा उठाया और कहा कि प्रधानमंत्री मुश्किल सवालों का ठोस जवाब देने से बच रहे हैं। कुछ आलोचकों ने कहा कि यह टिप्पणी संसद की गरिमा के अनुरूप नहीं थी और इससे सरकार की गंभीरता पर सवाल उठते हैं।
हार्स ऑफ कॉमन्स में यह बहस ऐसे समय में आई है जब स्टार्मर की लेबर सरकार भारी राजनीतिक दबाव में है, खासकर डिजिटल पहचान कार्ड और आर्थिक नीतियों को लेकर। सरकार ने पहले डिजिटल पहचान को अनिवार्य बनाना चाहा था, लेकिन विरोध के बाद इस योजना को बदल दिया गया है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि सरकार नीतिगत ठोस योजना दे पाने में असफल रही है, और इसीलिए प्रधानमंत्री को मजाक का सहारा लेना पड़ा।
सोशल मीडिया पर भी इस बयान का वीडियो तेजी से वायरल हुआ और आम लोगों के बीच भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ ने इसे हास्य की कोशिश बताया, तो कई लोगों ने इसे अनुचित और असहज बताया।
विश्लेषकों का कहना है कि यह घटना सिर्फ एक मजाक नहीं है, बल्कि यह दिखाती है कि सरकार को गंभीर मुद्दों पर जवाब देने में कठिनाई हो रही है और विपक्ष इसे राजनीतिक रूप से उभार रहा है।
कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री की कामसूत्र वाली टिप्पणी ब्रिटेन में एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गई है। यह न सिर्फ संसद के भीतर बहस का विषय बनी, बल्कि जनता के बीच भी इसका बहुपक्षीय असर देखा जा रहा है।
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